PPR क्या है?
PPR का पूरा नाम Peste des Petits Ruminants है। यह बकरियों और भेड़ों में होने वाली एक बहुत ही खतरनाक वायरल बीमारी है। यह बीमारी इतनी तेजी से फैलती है कि अगर समय पर पहचान और रोकथाम न हो, तो पूरा का पूरा फार्म कुछ ही दिनों में तबाह हो सकता है।
आज की सच्चाई यह है कि कई सारे नए बकरी पालक (New Goat Farmers) सिर्फ PPR बीमारी की वजह से बकरी पालन पूरी तरह बंद करने पर मजबूर हो गए। शुरुआत में जब बकरी बीमार पड़ती है, तो नया किसान समझ नहीं पाता कि यह PPR है। वह सोचता है कि:
शायद मौसम बदलने की वजह से बकरी बीमार है
साधारण बुखार या दस्त होगा
1–2 बकरी ठीक हो जाएंगी
लेकिन जब तक किसान को असली बीमारी समझ आती है, तब तक:
बीमारी पूरे झुंड में फैल चुकी होती है
70–90% बकरियां बीमार पड़ जाती हैं
कई बकरियों की मौत हो जाती है
इलाज पर हजारों रुपये खर्च हो जाते हैं
यहीं से नए किसानों का हौसला टूट जाता है और कई लोग बकरी पालन छोड़ देते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि अगर समय पर PPR वैक्सीन लगवा दी जाए, तो यह पूरा नुकसान 100% रोका जा सकता है।
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PPR होने पर बकरियों में नीचे दिए गए लक्षण दिखाई देते हैं:
•तेज बुखार
•नाक और आंख से पानी आना
• मुंह में छाले, लार गिरना
• खाना बंद कर देना
• पतला दस्त (दस्त में बदबू)
• सांस लेने में दिक्कत
• कमजोरी और अचानक मौत
👉 अगर ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
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PPR वैक्सीन क्यों जरूरी है?
PPR का कोई पक्का इलाज नहीं है
सिर्फ वैक्सीनेशन से ही बचाव संभव है
वैक्सीन लगने के बाद बकरी में लंबे समय तक इम्युनिटी बनती है
फार्म को भारी नुकसान से बचाती है
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PPR वैक्सीन कब लगानी चाहिए?
पहली वैक्सीन: 3 से 4 महीने की उम्र में
बूस्टर: हर 3 साल में 1 बार (सरकारी गाइडलाइन अनुसार)
> ⚠️ अगर आपकी बकरी को पहले कभी PPR वैक्सीन नहीं लगी है, तो अभी लगवाना सबसे सही रहेगा।
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PPR वैक्सीन की डोज और तरीका
👉 PPR वैक्सीन skin के नीचे लगती है, muscle (inter-muscle) में नहीं।
✅ सही तरीका
Method: Subcutaneous (SC)
यानी त्वचा के नीचे
जगह:
गर्दन के पास
या कंधे के पीछे (जहाँ ढीली skin हो)
❌ गलत तरीका (मत लगाना)
❌ Inter-muscular / Muscle में नहीं
Muscle में लगाने से:
सूजन आ सकती है
दर्द ज्यादा होता है
वैक्सीन का असर सही नहीं पड़ता
💉 Dose (याद रखने लायक)
1 ml प्रति बकरी
साफ syringe इस्तेमाल करें
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PPR वैक्सीन कब नहीं लगानी चाहिए?
बकरी को तेज बुखार हो
बहुत कमजोर या बीमार हो
Deworming के 7 दिन के अंदर
गर्भ के आखिरी महीने में (डॉक्टर की सलाह के बिना)
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वैक्सीन लगाने के बाद क्या सावधानी रखें?
2–3 दिन बकरी को आराम दें
ट्रांसपोर्ट या मंडी न ले जाएं
ठंड, बारिश और तनाव से बचाएं
साफ पानी और संतुलित आहार दें
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PPR वैक्सीन की कीमत
सरकारी पशु चिकित्सालय: ₹5–₹10 प्रति बकरी
प्राइवेट: ₹30–₹50 प्रति बकरी (इलाके पर निर्भर)
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नई खरीदी गई बकरियों के लिए जरूरी सलाह
नई बकरी को पहले 7–10 दिन अलग रखें
उसके बाद ही PPR वैक्सीन लगवाएं
सीधे पुराने झुंड में न मिलाएं
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PPR वैक्सीनेशन से होने वाले फायदे
बकरी की जान सुरक्षित रहती है
बीमारी का खतरा लगभग खत्म
फार्म की ग्रोथ अच्छी होती है
लंबे समय में मुनाफा बढ़ता है
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Kanash Farming की खास सलाह
> PPR वैक्सीन को खर्च नहीं, निवेश समझें। एक वैक्सीन आपकी पूरी साल की मेहनत बचा सकती है।
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Disclaimer (अस्वीकरण)
यह जानकारी किसानों की सामान्य जानकारी के लिए है। वैक्सीनेशन से पहले अपने नजदीकी पशु चिकित्सक की सलाह जरूर लें।
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