आज के समय में खेती की सबसे बड़ी समस्या यह बनती जा रही है कि कई खेतों में गोबर खाद डालना संभव नहीं हो पाता।
इसके पीछे कई कारण होते हैं, जैसे:
गोबर खाद की कमी
खेत का रकबा बड़ा होना
मजदूरी और ढुलाई का खर्च ज्यादा होना
ऐसी जमीनों में धीरे-धीरे ऑर्गेनिक मिनरल्स और मिट्टी में कार्बन की प्रतिशत मात्रा कम हो जाती है।
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🌾 कार्बन की मात्रा कम होने पर क्या समस्या आती है?
• कोई भी रासायनिक खाद डालो
• या कोई भी जैविक खाद डालो
वो पूरा असर नहीं दिखा पाती।
👉 क्योंकि मिट्टी के अंदर मौजूद
खाद को एक्टिव करने वाले लाभकारी सूक्ष्म जीवाणु (Micro Organisms)
या तो कमजोर हो जाते हैं या खत्म हो जाते हैं।
जब तक ये जीवाणु सक्रिय नहीं होंगे,
तब तक डाली गई खाद पौधों तक सही तरीके से नहीं पहुँचती।
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• मिट्टी सख्त और बेजान हो जाती है
• जड़ों का विकास कमजोर रहता है
• पानी रोकने की क्षमता कम हो जाती है
• फसल की बढ़वार रुक जाती है
• खाद पर किया गया खर्च बेकार चला जाता है
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🌿 समाधान क्या है?
अगर हमें:
• मिट्टी में कार्बन की मात्रा बढ़ानी है
• लाभकारी जीवाणुओं को दोबारा जिंदा करना है
• और वो भी कम खर्च में
• तो हमें खेत में कुछ सस्ते और प्रभावी तरल (Liquid) पदार्थ बाहर से डालने पड़ते हैं।
👉 यही काम करता है जीवामृत।
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🌱 जीवामृत क्या है?
जीवामृत एक देसी और जैविक तरल खाद है,
जो मिट्टी में:
• कार्बन बढ़ाता है
• अच्छे जीवाणुओं की संख्या बढ़ाता है
• रासायनिक और जैविक खाद को एक्टिव करता है
• जमीन को दोबारा उपजाऊ बनाता है
इसीलिए जिन खेतों में गोबर खाद डालना मुश्किल होता है,
वहाँ जीवामृत सबसे सस्ता और असरदार उपाय माना जाता है।
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🧪 जीवामृत बनाने की सामग्री (200 लीटर के लिए)
• देसी गाय का गोबर – 10 किलो
• देसी गाय का गोमूत्र – 5 से 10 लीटर
• गुड़ (पुराना हो तो बेहतर) – 2 किलो
• बेसन / चना आटा – 2 किलो
• खेत की जिंदा मिट्टी – 1 मुट्ठी
• साफ पानी – 200 लीटर
👉 देसी गाय का उपयोग सबसे अच्छा रहता है,
लेकिन देसी न मिले तो लोकल गाय का गोबर भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
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🛢️ जीवामृत बनाने की विधि (Step-by-Step)
🔹 स्टेप 1:
• एक प्लास्टिक ड्रम या टंकी लें।
❌ लोहे के बर्तन का उपयोग न करें।
🔹 स्टेप 2:
ड्रम में:
• 200 लीटर पानी भरें
• 10 किलो गोबर डालें
लकड़ी की डंडी से अच्छी तरह घोलें
🔹 स्टेप 3:
अब इसमें डालें:
• 5–10 लीटर गोमूत्र
• 2 किलो गुड़
• 2 किलो बेसन
और सबको अच्छे से मिला दें।
🔹 स्टेप 4:
खेत की मेड़ या जड़ों के पास से
• 1 मुट्ठी जिंदा मिट्टी डालें
• 10–15 मिनट तक
घड़ी की सुई की दिशा में अच्छी तरह घोलें
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⏳ जीवामृत कितने समय में तैयार होता है?
•ड्रम को छांव में रखें
•ऊपर से ढक दें, लेकिन पूरी तरह बंद न करें
•दिन में 2 बार लकड़ी से घोलें
⏱️ 48 घंटे (2 दिन) में जीवामृत तैयार हो जाता है
👉 72 घंटे तक उपयोग किया जा सकता है
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🚜 जीवामृत का उपयोग कैसे करें?
🌾 मिट्टी में देने के लिए:
•200 लीटर जीवामृत / 1 एकड़
•सिंचाई के पानी के साथ
•या ड्रिप सिस्टम से
🌿 छिड़काव (स्प्रे) के लिए:
•1 लीटर जीवामृत + 10 लीटर पानी
•सुबह या शाम छिड़काव करें
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📅 जीवामृत कब डालें?
•रोपाई के 7–10 दिन बाद
•फूल आने से पहले
•फल या दाना बनने के समय
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❗ जरूरी सावधानियाँ
❌ धूप में जीवामृत न रखें
❌ लोहे के बर्तन का उपयोग न करें
❌ 4–5 दिन पुराना जीवामृत खेत में न डालें
✔ हमेशा ताजा जीवामृत का ही उपयोग करें
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🌱 Kanash Farming का Practical Tip
अगर आप जीवामृत में:
•5 लीटर छाछ
या
•1 लीटर मट्ठा
मिला देते हैं,
तो लाभकारी जीवाणु और तेजी से बढ़ते हैं
और रिजल्ट जल्दी दिखाई देता है।
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🌾 निष्कर्ष (Conclusion)
जिन खेतों में:
•मिट्टी में कार्बन कम है
•खाद डालने के बाद भी असर नहीं दिखता
•गोबर खाद डालना संभव नहीं है
उनके लिए जीवामृत एक सस्ता, देसी और भरोसेमंद समाधान है।
नियमित उपयोग से मिट्टी जिंदा होती है
और फसल की बढ़वार साफ दिखाई देती है।
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